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विशेष : आपातकाल का वह काला दिन

अरविंद जयतिलक 25 जून, 1975 को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गर्दन मरोड़कर देश में आपातकाल थोप दिया था। उन्होंने न सिर्फ संविधान की धज्जियां उड़ायी बल्कि जनतांत्रिक मूल्यों को भी नजरअंदाज कर मानवीय मूल्यों की निर्ममता से हत्या की। देश कराह उठा। अब जब भी…

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गृहमंत्री से मुलाकात के बाद पहलवानों की जुबानी… नौकरी-सत्याग्रह दोनों करेंगे  

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया रेलवे में अपनी नौकरी पर वापस लौट गए हैं| ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने गृहमंत्री से मुलाकात की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि वो अब नौकरी भी करेंगे और बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी तक…

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देव- दिलीप और राज की त्रिमूर्ति ने बनाया बालीवुड का रास्ता

लेखक : दिलीप कुमार ग्रेट शोमैन राज कपूर साहब करिश्माई फ़िल्मकार, अदाकार थे. राज कपूर साहब सिनेमैटोग्राफी में जादूगर थे. सिनेमाई समझ ऐसी की सीन शूट करते हुए कैमरा पर्सन राजसाहब से पूछता कि साहब कैमरे का एंगल ठीक है. मासूमियत भरी अदायगी यथार्थ भाव के बादशाह राज कपूर साहब का न भोलापन जब पर्दे…

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…जब सिनेमा पर चढ़ा रवींद्र संगीत का जादू

लेखक : दिलीप कुमार गुरु रवींद्रनाथ टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, उन्होंने हज़ारों गीत लिखे वहीँ संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग ही दुनिया रची. रवींद्र संगीत रचा, हज़ारों धुनें उन्होंने गढ़ी जो उनकी मौलिक थीं. जिसे संगीत की दुनिया में रवींद्र संगीत नाम से जाना गया है.. आज बहुतेरे लोगों को पता…

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सदाबहार अभिनेता सुनील दत्त… जिन्होंने राजनीति को समाजसेवा माना

लेखक : दिलीप कुमार सुनील दत्त बहुमुखी इंसान, जितने भी किरदार किए बेदाग रहे, आजीवन जेन्टलमैन के रूप में याद किए जाते हैं. सुनील दत्त किसी के लिए राजनेता थे, किसी के लिए बहुत उम्दा अदाकार, किसी के लिए उत्तम आचरण वाले इंसान थे. सुनील दत्त हिन्दी सिनेमा के पहले ऐसे अदाकार हैं, जिन्होंने राजनीति…

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श्रधांजली : राजनीति के असाधारण व्यक्तित्व राजीव गांधी

लेखक : दिलीप कुमार आज देश की अधिकांश नई पीढ़ी को पता भी नहीं होगा, कि देश के नौवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या क्यों हुई! कैसे हुई? पता भी कैसे हो आज तो इतिहास बदलने का चलन शुरू हो गया है. आज लोगों को पता भी नहीं कि राजीव गांधी देश के लिए क्यों…

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अम्बेडकर दर्शन मौजूदा समय में ज्यादा आवश्यक

डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन आज भारतीय संविधान के शिल्पी डाक्टर अम्बेडकर की जन्म जयंती है| माता- पिता की 14 संतानों में से एक डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल को मनाने का संकल्प राजनीतिक फैसले से कहीं बढ़कर है| जहाँ सिर्फ ये भावना नहीं होनी चाहिए कि अन्य राजनेताओं का…

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हिन्दी सिनेमा के पहले सुपरस्टार- गायक के एल सहगल

लेखक : दिलीप कुमार जब दिल ही टूट गया, हम जी कर क्या करेंगे” ये गीत टूटे हुए आशिकों के म्यूजिक प्ले लिस्ट में या फिर गुनगुनाते हुए सुना जा सकता है. यह गीत 72 साल पहले हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार सहगल साहब ने गया था. आम तौर पर ऐसी महान जिन्दगियों के बारे…

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हनुमान जन्मोत्सव और जयंती में अंतर

लेखक : डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन हनुमान जन्मोत्सव बनाम हनुमान जयंती मानव द्वारा बनाई गई संस्कृति के दायरे में जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है और वह अपना जीवन पूरा करने के बाद इस नश्वर दुनिया से विदा लेता है तो उसके बाद उसके जन्म की तिथि को समाज परिवार के…

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महावीर जयंती और वर्तमान में प्रासंगिकता

लेखक : डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन जिन लोगों ने अपनी इंद्रियों पर वश कर लिया वही जिन से जैन के रूप में प्रतिष्ठित हो गए और ऐसे 23 तीर्थंकर पृथ्वी पर अवतरित हुए जिनमें सबसे पहले ऋषभदेव थे लेकिन 24वें तीर्थंकर वर्धमान नाम से इस दुनिया में आए और कालांतर में वही…

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