समाज के सभी लोगों को गले लगाता है महिमा पंथ
भारत की राष्ट्रपति ने महिमा पंथ की एक बैठक को संबोधित किया
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा के संबलपुर स्थित मिनी स्टेडियम में महिमा पंथ की एक बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने संत कवि भीमा भोई के लिए अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षाएं और आदर्श हमेशा उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि संत कवि भीमा भोई इसका अनूठा उदाहरण हैं कि औपचारिक शिक्षा के बिना भी उच्च गुणवत्ता वाले साहित्य की रचना की जा सकती है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि संत कवि भीमा भोई के पास अद्वितीय अंतर्दृष्टि थी। यही कारण है कि उन्होंने अनेक कालजयी छंदों की रचना की, जो आज भी सभी जगह गाए जाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भीमा भोई के कार्यों में सबके हित में सामाजिक समानता व आदर्श प्रतिबिंबित होता है और वे हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। उन्होंने युवा पीढ़ी से भीमा भोई के आदर्शों को अपनाने का अनुरोध किया। राष्ट्रपति ने बताया कि महिमा गोसेन ने महिमा पंथ की शुरुआत की थी और यह पंथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। इसे देखते हुए समाज के लगभग सभी वर्गों के लोग इस संप्रदाय की ओर आकर्षित हुए। भीमा भोई ने समाज में समानता लाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया और अपने भाषणों, गीतों व कविताओं के माध्यम से इस पंथ के दर्शन का प्रचार- प्रसार किया।

