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कारगिल युद्ध : भारतीय वीरों ने 22 साल पहले लिखी थी शौर्य की कहानी

  • तत्कालीन सेनाप्रमुख ने कहा पाकिस्तानी इलाकों को कब्जा करने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।

कारगिल युद्ध के 22 साल पूरे होने पर देश आज उन वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है जिन्होंने इस युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अपने प्राणों की आहूति दी थी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत समूचे देश ने आज उन वीरों को नमन किया। उधर इस पूरे मामले पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने कहा है कि कारगिल  में सीजफायर से पहले सुरक्षाबलों को एलओसी के पास पाकिस्तानी इलाकों पर कब्जा करने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। युद्ध के 22 साल बाद मलिक ने कहा कि ऑपरेशन विजय राजनीतिक, सैन्य और राजनयिक रूप से दृढ़ कार्रवाई थी, जिसने हमें खराब स्थिति को भी मजबूत सैन्य और राजनयिक जीत में बदलने में मदद की ।

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को शिकस्त दी थी। भारतीय नियंत्रण रेखा (एलओसी) से पाकिस्तानी सैनिकों को हटाने के लिए मई 1999 में कारगिल युद्ध शुरू हुआ था। 3 मई 1999 को शुरू हुआ कारगिल युद्ध 2 महीने से भी अधिक चला था और 26 जुलाई को जंग खत्म हुई थी। करगिल जंग के दौरान भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाया था।

कारगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना की साजिश थी। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की जानकारी के बिना तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने उस संघर्ष को अंजाम दिया था। करगिल युद्ध में मदद मांगने और पीएम की कुर्सी बचाने के मकसद से नवाज शरीफ अपने परिवार के साथ अमेरिका गए थे। उस वक़्त तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी शरीफ से दो टूक कह दिया था कि पाकिस्तान को सेना हटानी ही होगी। इसके बाद भारतीय सेना ने शौर्य का परिचय देते हुए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

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