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जल-शक्ति को मिलकर मजबूत करेंगे भारत- नेपाल

भारत और नर्वे तेजी से करीब आ रहे हैं| दोनों देश अपनी जल शक्ति को मजबूत करने के लिए साझा कदम उठा रहे हैं| इसी कवायद में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने नई दिल्ली में नॉर्वे के व्यापार और उद्योग मंत्री श्री जान क्रिश्चियन वेस्ट्रे के साथ एक बैठक की। इन मंत्रियों ने द्विपक्षीय हित के मुद्दों पर चर्चा की। इनमें हरित पत्तन व पोत परिवहन, नाविकों का प्रशिक्षण, भविष्य के पोत परिवहन और टिकाऊ पोत रीसाइक्लिंग (फिर से उपयोग योग्य बनाना) के लिए हरित अमोनिया व हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग शामिल हैं। इसके अलावा भारत में हरित तटीय पोत परिवहन कार्यक्रम समाधान के कार्यान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने पत्तनों और नौवहन क्षेत्र में शून्य उत्सर्जन समाधानों को लागू करने के लिए विशिष्ट प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों देश तेजी से अपनी द्विपक्षीय आर्थिक और तकनीकी पूरक संबंधों का उपयोग कर रहे हैं। भारत-नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय यात्राओं के माध्यम से मजबूत किया जाता है। दोनों देशों के बीच अंतिम संयुक्त कार्यकारी समूह समुद्री बैठक नवंबर, 2022 में हुई थी। मंत्रालय ने जून, 2022 में ब्लू इकनॉमी (सामुद्रिक अर्थव्यवस्था) पर भारत-नॉर्वे कार्य बल के 5वें संस्करण में भी हिस्सा लिया था। इसके अलावा भारत ग्रीन वॉयज (हरित जलयात्रा)- 2050 का भी हिस्सा है। इसे नॉर्वे सरकार और आईएमओ की एक भागीदारी वाली परियोजना है, जिसे मई 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भविष्य में पोत परिवहन उद्योग को कम कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाना है।

इस बैठक के दौरान श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि नॉर्वे के मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच पत्तन और पोत परिवहन के क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, ” प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हरित पत्तन और हरित पोत परिवहन की सोच को पूरा करने के लिए, हम हाइड्रोजन ईंधन सेल फेरी, स्वायत्त भूतल पोतों, कम उत्सर्जन वाले एलएनजी-हाइब्रिड पोतों, शून्य उत्सर्जन सोलर बैटरी रो-रो फेरी पोत, अंतर्देशीय और तटीय एलपीजी/एलएनजी वाहक पर नॉर्वे की ओर से अपनी विशेषज्ञता साझा करने की उम्मीद कर रहे हैं।”

नॉर्वे के प्रतिनिधिमंडल में व्यापार और उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारत में नॉर्वे के राजदूत और नॉर्वे की विभिन्न कंपनियां शामिल थीं। वहीं, भारतीय पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्री के साथ एनएसबी के अध्यक्ष, अतिरिक्त सचिव (पीएसडब्ल्यू) और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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