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काल के प्रहार से मुक्त है महाकाल लोक

भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया अध्याय उज्जैन में महाकाल लोक के लोकार्पण के साथ शुरू हुआ! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर कहा कि महाकाल लोक देश के प्राचीन गौरव से जोड़ रहा है! मेघदूतम में उज्जैन की भव्यता का वर्णन है! उज्जैन के कण- कण में सांस्कृतिक इतिहास दर्ज है! महाकाल की नगरी प्रलय से मुक्त है! महाकाल में 88 तीर्थ हैं जिनके केंद्र में कालाधिराज महाकाल हैं! पीएम ने कहा कि भारत एकबार फिर विश्व के मार्ग दर्शन के लिए तैयार हो रहा है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण करने से पहले महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना की और आरती की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने महाकाल गर्भगृह में उपासना की! महाकाल के कॉरिडोर को पहले चरण में 316 करोड़ रुपये में विकसित किया गया है. 900 मीटर से अधिक लंबा महाकाल लोक कॉरिडोर पुरानी रुद्र सागर झील के चारों और फैला हुआ है. उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के आसपास के क्षेत्र को पुनर्विकास करने की परियोजना के तहत रुद्र सागर झील को पुनर्जीवित किया गया है!

गौरतलब है कि देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यहां महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित है और यहां देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. इस कॉरिडोर के लिए दो भव्य प्रवेश द्वार-नंदी द्वार और पिनाकी द्वार बनाए गए हैं. यह कॉरिडोर मंदिर के प्रवेश द्वार तक जाता है तथा मार्ग में मनोरम दृश्य पेश करता है! महाकाल मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर में 108 स्तंभ बनाए गए हैं, 910 मीटर का ये पूरा महाकाल मंदिर इन स्तंभों पर टिका होगा. महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है, सैकड़ों सालों के बाद उसे साकार रूप दे दिया गया है!

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