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आजादी के 75 सालों में एथलीट में पहला स्वर्ण : फ्लाइंग जट मिल्खा सिंह और उड़नतस्तरी पीटी उषा का सपना नीरज ने सच किया

आज के दिन गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने राष्ट्रीय गान जन गण मन लिखा था, आज ही ये गीत पहली बार भालफेंक में विजेता रही भारतीय टीम के व्यक्तिगत मुक़ाबले में नीरज चोपड़ा के सम्मान में बजा। नीरज ने पहली  बार अपने खेल से राष्ट्र गान बजवाकर देश का सीना चौड़ा कर दिया। नीरज ने न सिर्फ गोल्ड जीता बल्कि देश का गौरव भी जीता है।

नीरज ने शनिवार को अपने इवेंट के फाइनल में 87.58 मीटर दूर भाला फेंका और ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स में देश को ओलंपिक का पहला सोने का तमगा दिलाया. उन्होंने अपने इस गोल्ड मेडल को ‘फ्लाइंग सिख’ से मशहूर महान धावक मिल्खा सिंह को समर्पित किया. मिल्खा का हाल में घातक कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद निधन हो गया था।

‘आर्मी मैन’ नीरज चोपड़ा ने जैवेलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को जश्न मनाने का मौका दिया. उन्होंने स्वर्ण पदक जीतने के बाद तिरंगा लेकर मैदान का चक्कर लगाया और इसका जश्न मनाया.यह टोक्यो ओलंपिक में भारत का पहला और व्यक्तिगत स्पर्धा में ओलंपिक गेम्स का ओवरऑल दूसरा गोल्ड मेडल है. नीरज से पहले दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा ने 2008 ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था।

नीरज ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘मैं अपने इस गोल्ड मेडल को महान मिल्खा सिंह को समर्पित करता हूं. शायद मुझे स्वर्ग से देख रहे होंगे. मैंने स्वर्ण पदक जीतने के बारे में सोचा तो नहीं था, लेकिन कुछ अलग करना था. मैं जानता था कि आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा. मैं ओलंपिक गेम्स का रिकॉर्ड तोड़ना चाहता था, बस शायद इसी की वजह से।’ इस मौके पर हरियाणा सरकार ने अपने चैंपियन के लिए पुरस्कारों की झड़ी लगा दी। नीरज को छह करोड़ रुपए के पुरस्कार के साथ सरकारी नौकरी और प्लाट भी मिलेगा।

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