‘नहीं रचेंगे स्वांग भइया ‘हम तो चले हरिद्वार’
लखनऊ। कौन जाने एक झूठ के पीछे कितने और झूठ बोलने पड़ें, कितने स्वांग रचने पड़ें! सीधे- साधे चन्द्रप्रकाश बाबू अंततः तौबा कर ही लेते हैं कि नहीं रचेंगे स्वांग भइया ‘हम तो चले हरिद्वार।’ संस्कृति मंत्रालय नयी दिल्ली, संस्कृति निदेशालय उत्तर प्रदेश व भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से लेखक रामकिशोर नाग के लिखे…
