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मध्यमार्गी सिनेमा के सृजनकर्ता बासु दा  

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा का एक ऐसा फ़िल्मकार, एक ऐसा सृजनकर्ता, मध्यम वर्ग की कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारने वाले लेखक, पटकथा लेखक, ‘बासु चटर्जी’, जिनकी फ़िल्मों में ग्लैमर नहीं होता था, बल्कि उनकी फ़िल्मों का नायक-नायिका फिल्म में ज्यादा परिधान नहीं बदलते थे. उनकी फ़िल्मों में केवल और केवल किरदार होते…

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‘सीआईडी’ ने तैयार की थी सस्पेंस थ्रिलर सिनेमा की जमीन  

लेखक- दिलीप कुमार गोल्डन एरा का एक – एक गीत एक – एक फ़िल्म कई कहानियों को समेटे हुए है. सिनेमा के इस दौर को स्वर्णिम काल कहां जाता है. इस सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म से हिन्दी सिनेमा में तीन – तीन धूमकेतुओ का उदय हुआ था.  एक तो मिस्ट्री मेकर राज खोसला, वहीदा रहमान, एवं…

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अमजद खान की कहानी : गब्बर न कभी डरेगा न कभी मरेगा

दिलीप कुमार स्तंभकार एक शिक्षित, शालीन, शख्सियत बचपन में अमजद खान बहुत ही शरारती किस्म के बच्चे थे. अमजद खान अविभाजित लाहौर में जन्मे थे.हिन्दी सिनेमा के अभिनेता जयंत के पुत्र थे. अभिनेता बनने से पूर्व अमजद , दूरदर्शी निर्देशक के.आसिफ के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करते हुए बारीकियों को सीख रहे…

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संगीतकारों के लिए संगीत का पूरा पाठ्यक्रम.. सचिन दा

दिलीप कुमार लेखक हरदिल अजीज संगीतकार सचिनदेव बर्मन का मधुर संगीत आज भी श्रोताओं को भाव-विभोर करता है. उनके जाने के बाद भी बर्मन दादा के प्रशंसकों के दिल से एक ही आवाज निकलती है- ‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना…. यह बर्मन दादा के संगीत का अपना प्रभाव है. दरअसल उससे…

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मुहब्बत, गीतों एवं शायरी की दुनिया का ‘साहिर’ एहसास

गीतकार साहिर लुधियानवी पर विशेष   दिलीप कुमार लेखक “मैं पल दो पल का शायर हूँ पल दो पल मेरी कहानी है पल दो पल मेरी हस्ती है  पल दो पल मेरी जवानी है मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नग़मे गाकर चले गए” साहिर…

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सिल्वर स्क्रीन के पहले सुपर स्टार ‘दादामुनि’ अशोक कुमार

दिलीप कुमार लेखक हिन्दी सिनेमा का पहला हीरो, यूँ कहें सिल्वर स्क्रीन का पहला सुपरस्टार, हिन्दी सिनेमा में सभी के दादा मुनि ‘कुमुद कुमार गांगुली’ अशोक कुमार का जिक्र आते ही, जेहन में आता है, सिल्वर स्क्रीन का वो दौर जब भारतीय सिनेमा में हीरो जैसा कुछ होता नहीं था. अब तक भारतीय सिनेमा घुटनों…

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जन्मदिन : आज भी लाइन वही से शुरू होती है, जहाँ बिग बी खड़े हो जाते हैं..

जिस उम्र में लोग अपने पैरों पर खड़े होने में कांपने लगते हैं! उस उम्र में आज भी वो जहाँ पर खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीँ से से शुरू होती है! एंग्री यंगमैन से लेकर सदी के महानायक बनने का सफ़र तय करने वाले बिग बी आई अभिताभ बच्चन की जादुई शख्सियत ऐसी ही…

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श्रद्धांजली : डायलॉग डिलिवरी और स्टाइल का राजकुमार

दिलीप कुमार लेखक वैसे तो हर आदमी अपने आप में यूनिक और दूसरे आदमी से अलग होता है. हिन्दी सिनेमा में राजकुमार तो सचमुच एकदम जुदा किस्म की शख़्सियत थे. राजकुमार का ताब बाकियों से मेल नहीं खाता था. एक ठसक हमेशा उनके लहजे में रही है. राजकुमार के लिए कहा जाता था, कि जितना…

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रेणु की ‘मारे गए गुलफाम’ को अमर कर गई राज कपूर की ‘तीसरी कसम’

दिलीप कुमार लेखक बिहार के ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म तीसरी कसम हिन्दी सिनेमा की कालजयी फिल्म अपने आप में सिल्वर स्क्रीन पर फ्लॉप हो जाने के बाद भी अपनी सफलता की कहानी बयां करती है! फणीश्वरनाथ रेणु की लघुकथा ‘मारे गए गुलफाम’ की कहानी में प्रेम को परिभाषित करती हुई फिल्म ‘तीसरी कसम’ सिने…

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श्रद्धांजली : एक इंस्टीट्यूशन… महमूद मेरे महमूद मेरे

श्रद्धांजली : एक इंस्टीट्यूशन… महमूद मेरे महमूद मेरे दिलीप कुमार दिलीप कुमार लेखक हिन्दी सिनेमा में  महमूद साहब की सिनेमाई यात्रा को याद न किया जाए तो एक प्रमुख चैप्टर से लोग महरूम रह जाएंगे। महमूद साहब ने केंद्र में रहते हुए एक लंबे समय तक दर्शकों का ध्यान खींचा है. उनका कॉमिक, भावनात्मक अभिनय…

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