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आदिपुरूष जैसा सिनेमा आने वाली पीढ़ी के लिए घातक

चंद्रभूषण सिंह लेखक फिल्म अभिनेता, निर्देशक व चर्चित नाटककार हैं जब तक आप अपनी संस्कृति का संरक्षण नहीं करेंगे । तब तक आप के साहित्य को, संस्कृति को तोड़ा जाएगा, मोड़ा जाएगा और उस को वहाँ तक ख़त्म करने और परिवर्तन करने की कोशिश की जाएगी , जहां तक आप की सहिष्णुता ख़त्म न हो…

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श्रधांजली : हिन्दी सिनेमा को अपनी खुशबू से महका गईं नर्गिस  

लेखक : दिलीप कुमार हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार ज़िन्दगी में…. यह गीत सिल्वर स्क्रीन की सबसे नायाब जोड़ी राज कपूर साहब – नरगिस जी पर फिट बैठता है. जिन्होंने जुनून की हद तक प्रेम किया है, लेकिन मुकम्मल नहीं हुआ. हिन्दी सिनेमा में बहुत सी जोड़ियां बनी, बहुत सी यादगार भी हैं….

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आधुनिक थिएटर के पितामह…  पृथ्वीराज कपूर

: दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा के युगपुरुष’ पृथ्वीराज कपूर एक ऐसा नाम जो केवल और केवल अपनी अदाकारी के लिए अमर हैं. उनको आधुनिक भारतीय रंगमंच का पितामह कहा जाए तो शायद ठीक होगा. पृथ्वीराज कपूर एक ऐसा अदाकार जो अपनी कड़क आवाज, रोबदार भाव भंगिमाओं और नायाब अभिनय के कारण लगभग चार दशकों तक…

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सिनेमा के गिरते हुए दौर में उम्मीद की किरण हैं नवाज

लेखक : दिलीप कुमार पाठक   कुछ ऐक्टर होते हैं, जिनको पर्दे पर देखना सिर्फ़ अच्छा लगता है, उनकी मौजूदगी फिल्म को खास बना देती है. कई फ़िल्मों में ख़ास स्टोरी नहीं होती, फिर भी कुछ अदाकार अपनी वर्सेटैलटी से फिल्म के कथानक को रोचक बना देते हैं.. ऐसे ही  नवाजुद्दीन सिद्दीकी (नवाज़) हैं, जो…

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दसवें दिन केरल स्टोरी ने तोड़े कमाई के रिकार्ड

‘द केरल स्टोरी’ का जलवा लगातार बॉक्स ऑफिस पर बरकरार है|  फिल्म की कमाई को लेकर जो लोग ये सोच रहे थे कि अब इस हफ्ते फिल्म की कमाई की रफ्तार ठंडी पड़ जाएगी| ऐसे में उनके लिए चौंकाने वाली खबर सामने आई है| फिल्म की कमाई में भारी उछाल देखने को मिली है| ‘द…

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हिन्दी सिनेमा की कालजयी कृति… मंटो

लेखक : दिलीप कुमार सआदत हसन मंटो एक ऐसा नाम जो समाज के एक – एक रेशे को खोल कर देते थे. जिसने बिना किसी उम्मीद के अपने कहानियों का सृजन किया था.  यथार्थ को आतिश शब्दों का आकार देकर अपनी कहानियां कहीं…. मंटो खुद के लेखन के बारे में कहते थे – “मैं बाथरूम…

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जीवन के रंग गीतों में उतारने वाले शायर हसरत जयपुरी

लेखक : दिलीप कुमार हसरत जयपुरी की बेटी अपने पिता से कहती थीं, “मुझे आपके जैसे मुहब्बत के नग्मे लिखना हैं, आपकी तरह ज़िन्दगी का हर एक रंग लिखना चाहती हूं, मुझे भी शायरी लिखने का जुनून है. कैसे लिखूँ क्या करूँ? हसरत जयपुरी साहब अपनी बेटी से कहते थे ” शायरी तुमसे नहीं होगी,…

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“सिनेमा की अनोखी दास्ताँ सुचित्रा सेन”

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा की दुनिया जितनी विचित्र है, सिनेमा की दुनिया के लोग भी थोड़ा अज़ीब ही है. हिन्दी सिनेमा में एक ऐसी ही अदाकारा सुचित्रा सेन हुईं हैं, जो अपनी अनोखी लाइफस्टाइल के लिए याद की जाती हैं. सुचित्रा सेन के बिना हिन्दी सिनेमा की दुनिया कभी पूरी ही नहीं हो…

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उत्पल दत्त : रंगमंच का विद्रोही अदाकार

लेखक : दिलीप कुमार आज अधिकांश सिनेमाई प्रशंसको को उत्पल दत्त याद  नहीं होंगे. अधिकांश लोग तो उन्हें कॉमिक टाइमिंग के लिए ही जानते हैं. उत्पल केवल एक अदाकार नहीं थे, वो एक क्रांतिक रंगकर्मी भी थे. उत्पल विविधतापूर्ण अभिनय के लिए याद आते हैं. ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमिक कालजयी फिल्म गोलमाल में उनकी हास्य…

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फारुख शेख : भरोसेमंद सदाबहार कलाकार

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा की भी अज़ीब सी दुनिया है, यहां कला फ़िल्मों को बोरिंग कहकर खारिज कर दिया जाता है, वहीँ समानान्तर सिनेमा के कलाकारों को एक रस का कलाकार कहकर सीमाओं में बाँध दिया जाता है, लेकिन कई बार सिद्ध हो चुका है, कि समानान्तर सिनेमा ही प्रमुख सिनेमा है. समानान्तर…

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