बर्फ की सफ़ेद चादर ओढ़ने वाला कारगिल होगा हरा- भरा
Identification of Science, Technology and Innovation needs for sustainable development of Kargil
- कारगिल के सतत विकास हेतु विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी आवश्यकताओं की पहचान
कारगिल : चारों ओर पहाड़ से घिरे दुर्गम कार्गिल क्षेत्र को हरा-भरा करने की कोशिश तेज हो गई है| आने वाले समय में यह क्षेत्र कृषि, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, इको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा| साथ ही ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशी जाएंगी|
इसी प्रक्रिया में कारगिल क्षेत्र के सतत एवं समावेशी विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) आधारित हस्तक्षेपों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएससीपीआर), उन्नत भारत अभियान (राष्ट्रीय समन्वय संस्थान-आईआईटी दिल्ली), क्षेत्रीय समन्वय संस्थान-आईआईटी जम्मू तथा प्रतिभागी संस्थान-गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, कारगिल ने संयुक्त रूप से बैठक का आयोजन किया।
इस बैठक का आयोजन सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की “ग्रामीण विकास के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों का उपयोग: पहलों का विस्तार और अवसरों की पहचान” शीर्षक पहल के अंतर्गत किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के नॉलेज पार्टनर्स थे—सीएसआईआर–सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएफटीआरआई), मैसूरु तथा सीएसआईआर–नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनआईआईएसटी), तिरुवनंतपुरम।
बैठक में भौगोलिक दुर्गमता, कठोर जलवायु परिस्थितियां तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों तक सीमित पहुंच जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर भी चर्चा की गई|
सत्र का आरंभ गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, कारगिल की प्राचार्य सुश्री डिस्केट आंग्मो के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके उपरांत सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने अपने संबोधन में सतत आजीविका को बढ़ावा देने तथा समावेशी क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने में विज्ञान-आधारित हस्तक्षेपों और हितधारकों के बीच साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अन्य गणमान्य वक्ताओं प्रो. रंजना अग्रवाल, डॉ. योगेश सुमन, प्रो. पी.के. सिंह तथा प्रो. मीनाक्षी राजीव ने कारगिल क्षेत्र के सतत विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र, कारगिल की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. नसरीन एफ. काचो ने की, जबकि इसका संचालन गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, द्रास के प्राचार्य मोहम्मद नासिरुल मेहदी शबानी ने किया। इस सत्र में देश के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र से संबंधित अपने अनुभवों और प्रौद्योगिकी नवाचारों को साझा किया।
सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के वैज्ञानिक-एफ डॉ. आर.एस. प्रवीन राज ने पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उपयुक्त उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों, जिनमें कृषि फसलों के लिए डीह्यूमिडिफाइड ड्राइंग प्रौद्योगिकी भी शामिल है, पर प्रस्तुति दी।
सीएसआईआर-सीएफटीआरआई के वैज्ञानिक-एफ डॉ. आशीतोष इनामदार ने कारगिल क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मूल्य संवर्धन तथा खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की।
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