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जनता की जय-जयकार, वोट की दरकार

मनीष शुक्ल

वरिष्ठ पत्रकार

जनता एकबार फिर जनार्दन है। चारों ओर उसकी जय जयकार हो रही है। चाहे कोई राजनीतिक दल हो या फिर नेता आजकल सपने में भी सारे मिलकर जनता का गुणगान गा रहे हैं। दिन हो रात, हर पल नेता जी जनता की सेवा में खुद को बिजी बता रहे हैं। मरहम लेकर जनता के दर्द के पीछे पीछे घूम रहे हैं। पाँच सालों तक जनता मोहल्ले की ओर मुंह भी न फेरने वाले अब जनता के पैर दबा रहे हैं। जी हाँ चुनाव का मौसम जो लौट आया है। नेताजी को वोटों की दरकार है, इसीलिए जनता की जय- जयकार है। तो आइये जनता से ही दो टूकबोल कर जानते हैं कि नेताजी जनता के दर्द पर कितना मरहम लगाया और उसको कितना मजा आया।

एंकर : जनता जनार्दन की तो आजकल चाँदी है। नेताजी तो आपको हर रोज नए- नए तोहफे दे रहे होंगे?

जनता : हाँ, जी ! पहिले तो कोई हमारी गली में झाँकने भी नहीं आ रहा था लेकिन आजकल तो हर दिन कोई न कोई नेता मिलने आ रहा है। कोई अम्मा के पैर छू रहा है तो कोई बेटे रिंकू की नाक पोंछ रहा है। मोहल्ले वाले कहि रहे हैं। चुनाव आने वाला है इसीलिए नेता और उनके चमचे मोहल्ले का चक्कर लगा रहे हैं।

एंकर : केवल चक्कर ही लगा रहे हैं या फिर कुछ तोहफा भी दे रहे हैं?

जनता : हाँ, भैया… एक नेता जी आए रहे बोले कि उनका वोट देयों तो अम्मा का फ्री मा तीर्थ भेजवा देंगे। दूसरे आए रहे कह रहे थे कि अगर वो चुनाव जीते तो बिटिया को स्कूटी देंगे। एक नेता जी हमारे लिए शूट-  कोट दिलवाए की बात कह रहे थे। तो एक नेता पप्पू के लिए लैपटॉप तो दूसरे रिंकू के लिए लालीपॉप दिलाने का वादा कार गए हैं।

एंकर : आपको क्या लग रहा है नेताजी अपना वादा पूरा करेंगे?

जनता : अब का बताई भईया! वादा तो पाँच साल पहले भी नेता लोग कर के गए रहे। एक नेता जी कहे थे कि तुम्हारे मोहल्ले को लंदन अमरीका की तरह चमका देंगे। नल से मिनरल वाटर पिलाएंगे। एक बोले थे उनकी सरकार आई तो घर में बैठ के खिलवाएँगे, दूसरे बोले थे कि जनता का राज लाएँगे लेकिन पाँच साल तो बीत गए। वादा पूरा होने का अभी भी इंतजार है। अब नए नेता भी वही सब वादे कर रहे हैं। शायद अबकी बार वादे पूरे करे सरकार।

एंकर : केवल वादे ही कर रहे हैं कि आपकी समस्याएँ भी सुन रहे हैं नेता जी?

जनता : हाँ, जो आता है पूछता है कौनों तकलीफ तो नहीं है, अगर है तो बताओ, हम दूर कर देंगे। हम नेता जी कहते हैं कि कोई खास समस्या तो नहीं है लेकिन नल से कभी- कभी साफ पानी नहीं आता है। हैंडपंप भी कभी- कभी खराब हो जाता है। सड़क के गड्डे भरे जाते हैं लेकिन फिर हो जाते हैं। सीजन में भी आटा, चावल, तेल दालें,  प्याज, आलू- टमाटर का रेट कम नहीं होता है। रोड लाइट चोर चुरा ले जाता है। बाकी और भी हैं लेकिन इत्ती ही  ठीक हो जाएँ तो कुछ राहत मिले। नेता जी कहते हैं बस, हमें वोट दो तो सारी समस्या दूर कर देंगे। मोहल्ले की  सड़क को कैटरीना कैफ के गालों की तरह चमका देंगे। 

एंकर : आपको लगता है कि नेता जी वादे पूरे करेंगे?

जनता : उम्मीद पे तो दुनियाँ कायम है। इत्ते साल भी विश्वास ही किया है। कुछ काम हुआ, कुछ नहीं। कुछ वादे पूरे हुए, कुछ सपने अधूरे ही रह गए। लेकिन उम्मीद है कि एक दिन नेताजी सारे वादे पूरे करेंगे।

एंकर : तो आप निराश नहीं हो। वोट जरूर दोगे?

जनता : भईया, अगर जनता ही निराश हो जाएगी तो देश आगे कैसे बढ़ेगा। हमें उम्मीद है कि एक दिन हमारी समस्याएँ खत्म होंगी। भारत एक दिन विश्व गुरु बनेगा। और दुनियाँ का नेतृत्व करेगा। इसीलिए हम वोट जरूर देंगे। अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे।

एंकर : आप कैसा नेता चाहते हैं।

जनता : ऐसा नेता चाहते हैं जो सपने दिखाए तो अपने वादे पूरे भी करे। ऐसा नेता चाहते हैं जो चुनाव खत्म होने के बाद भी जनता का दुख दर्द जानने चला आए। सारी समस्याएँ भले ही न दूर कर सके लेकिन उनको दूर करने की कोशिश जरूर करे। केवल लालीपॉप थमाकर पाँच साल के लिए गायब न हो जाए।

एंकर : लेकिन सारे नेता अलग- वादे कर रहे हैं। कोई कार दे रहा है तो कोई स्कूटी तो कोई तीर्थ यात्रा कराने का वादा कर रहे हैं। ऐसे में आप क्या करेंगे, किसको वोट देंगे।

जनता : देखिये नेता जी हमसे वादे कर रहे हैं तो हम भी नेता जी से वादे कर रहे हैं। हम भी सबसे कह रहे हैं कि आपको ही वोट देंगे लेकिन वोट उसको ही देंगे जो देश, समाज और जनता का सही मायने में भला करने की शक्ति रखता होगा।

एंकर : अंत में आप अपने नेताजी को क्या संदेश देंगे?

जनता : हम तो यही कहेंगे कि चुनाव लोकतन्त्र का त्योहार है। सारे नेता इसको मिलकर मनाएँ न कि आपस में लड़कर और जनता को आपस मेँ लड़वाएँ। एक दूसरे पर कीचड़ न फेंके बल्कि प्रेम के रंग- गुलाल उड़कर पूरे देश का चेहरा खिलाए और मुस्कराहट लाएँ।

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