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यो पर्यटन की कहानी : आज की नारी, दुनियां घूमने की तैयारी

लेखक : अभिषेक सिन्हा

लेखक भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व छात्र और वर्तमान में ओयो होटल और कम्युनिकेशन के वरिष्ठ निदेशक हैं|

अपने सपनों के पहाड़ चढ़ती महिलाएं, अपनी ही तरह मंजिल तलाशती, समुद्र की लहरों को एकटक देखती महिलाएं, किसी दूर दराज कैफे  में बैठी कॉफी की चुस्कियों के साथ अपने संघर्षों के किस्से याद कर मंद- मंद मुस्कराती महिलाऐं, किसी अनजान शहर की तंग गलियों में खुद को खोती और तलाशती हुयी महिलाऐं और अपने बारे में बरसों से गढ़े गए हर  पूर्वाग्रह को ट्रेन, बस, टैक्सी, हवाई जहाज में सफ़र करते हुए पैरों से रौंदती महिलाऐं| कभी अकेले तो कभी अपनी ही जैसी कई और महिलाओं के साथ नयी दुनियां और नयी मांज़िलों से दोस्ती करती यह महिलाए एक सैलानी के तौर पर नयी पहचान बना रही हैं।

पर्यटन के क्षेत्र में वीमेन ओनली ट्रेवल का चलन तेजी से उभर रहा है, जिसके दो आयाम हैं . सोलो वुमन ट्रेवल जिसमें एक महिला सफर पर अकेले ही निकल पड़ती है और ग्रुप वीमेन ट्रेवल जिसमें कई महिलाएं का एक समूह बिरादरी की भावना से जुड़ा हुआ साथ में यात्रा करता है।

आर्थिक उदारीकरण का करिश्मा

क्या यह सब अचानक हो गया? अगर पिछले कुछ दशकों पर  डालें तो एक एक तस्वीर उभर कर सामने आती है जिसमें  महिलाएं  धीरे धीरे अपनी बेड़ियां काटती और खुले आसमान में उड़ान के लिए हरसंभव प्रयास करती दिखती हैं। नब्बे के शुरुआती सालों में जब आर्थिक उदारीकरण का दौर शुरू हुआ तो व्यावसायिक शिक्षा ने भी देश के हर शहर में अपने पांव पसारने शुरू किये और उसी के अब तक घर की चारदीवारी में कैद महिलाओं की ज़िन्दगी में महत्वाकांक्षाओ ने भी दस्तक देना शुरू किया । किसी तरह अपनी बेटी की शादी कर उसको घर से विदा कर देने वाली मानसिकता बदलने लगी और उनकी पढ़ाई लिखाई पर ज़्यादा ध्यान देने वाला मध्यम वर्ग उभरने लगा और यही से नीव पडी महिलाएं एक ऐसे समाज की जो खुद के प्रति बेहद आश्वस्त अपने सपनो को पूरा करने की लिए गंभीर और अपनी मेहनत से खुद के लिए एक अलग पहचान बनाने के ललए दृढ़संकल्प  था।

विद्या की ताकत से मजबूत अपने अपने पैरों पर खड़े होकर आर्थिंक स्वावलंबन हासिल करती महिलाओं के लिए कामकाज के सिलसिले में एक शहर से दूसरे या फिर एक देश से दूसरे देश जाना सामान्य सा हो चला|  एक बार घर से कदम बाहर निकले तो उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और महिलाऐं एक के बाद दूसरी मंजिल तलाशती और उन्हें हासिल करती गयी।

प्रेरणास्रोतों की लम्बी फेहरिस्त

पिछले कुछ सालों में महिलाओं के कई ऐसे समहू  उभर कर सामने आये हैं  जिन्होंने देश दुनियां के देखे अनदेखे हिस्सों और उनसे जुड़े किस्सों को कई सारी चुनौतियों के बावजूद देखा समझा और करीब से महसूस किया| भारतीय नौसेना की छह जांबाज महिलाओं ने साल २०१९ में ५५ फ़ीट लम्बे समुद्री जहाज में करीब साल भर का सफर तय कर दुनियां भर का चक्कर लगा लिया ।  इससे पहले साल २०१५ में तीन भारतीय महिलाओं ने  एक कार में दिल्ली से लन्दन तक का सफर करीब तीन महीनों में पूरा कर लिया ।  इस यात्रा में उन्होंने १७ देशों को पार करते हुए करीब २१००० ककलोमीटर की यात्रा तय कर ली। महिलाओं को सभी डर और सांशय मिटाकर घूमने के लिए प्रेरित करने वालों में समीरा दहिया का नाम भी प्रमुख है। समीरा अपनी बाइक पर करीब एक महीने में ही देश भर के १०० शहरों का चक्कर लगा चुकी हैं।

इन सभी महिलाओं ने देश भर की हजारों अपने ही जैसी महिलाओं में पर्यटन के प्रति रूचि तो पैदा की ही, साथ ही यह

हौसला भी दिया कि जिजीविषा और सकारात्मक सोच के साथ वो अपने सपनो को पूरा कर सकती हैं।

मेरी पारिवारिक मित्र और पेशे से अध्यापिका शिल्पी बनर्जी ने हाल ही में एक मुलाकात के दौरान ज़िक्र किया कि कुछ वर्षों पूर्व  उन्होंने पहली बार एक सैलानी के तौर पर अकेले ही पहाड़ों का रुख कर लिया और तबसे उनके  पाँव रुके  नहीं हैं। अकेले घूमने के दौरान उन्होंने केवल भारत को बल्कि खुद को भी करीब से जानने का मौका लमला। उनका आत्मविश्वास तो बढ़ा ही है साथ ही कई देश और समाज को लेकर कई पूर्वाग्रह भी टूटे हैं।

पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं

पर्यटन और होटल उद्योग से जुड़ी कई कम्पनियाँ एक पर्यटक के तौर पर महिलाओं के बढ़ते प्रभुत्व को पहचान रही हैं।कम्पनियों  को इस बात का बखूबी अहसास है कि  यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें विकास की असीम संभावना हैं। यही

वजह है कि ऑनलाइन होटल एग्रीगेटर और देश की चुनिन्दा स्टार्टअप में से एक ओयो ने हाल ही में सोलो और ग्रुप

वीमेन ट्रेवल को बढ़ावा देने वाली कम्पनी एडवेंचर वीमेन इंडिया के साथ एक करार की घोर्षणा की जिसके तहत ओयो इस ग्रुप से जुड़ी महहलाओां को सफर के दौरान रियायती दरों पर होटल रूम देगी।

कई सारे ऑनलाइन प्लेटफॉम भी ऑल वीमेन ट्रेवल या सोलो वुमन ट्रेवल को प्रोत्साहन देने की दशा में उल्लेखनीय

प्रयास कर रहे हैं। इनमें शी द पीपल, द सोलो ग्लोबट्रॉटर एवुमन ऑन वांडरलकट, पिंक पन्गा और वांडर वोमनया

प्रमुख हैं जहाँ अकेले या फिर अपनी घूमने फिरने की शौक़ीन अपनी जैसी ही महिलाओं के समूह के साथ यात्रा करने के लिए  जरुरी जानकारियां और सुझाव दिए जाते हैं।

कई सारे स्टार्टअप यात्रा के दौरान महिलाओं के सामने आने वाली दिक्कतों को दूर करने के समाधान भी ढूढ़ रहे हैं।

लुटेल नाम की कम्पनी राष्ट्ट्रीय राजमागों पर महिलाओं के लिए सफ़र  सुरक्षत एयर आधुनिक सुविधाओं से युक्त

शौचालयों का जाल बिछा रही हैं।

क्रमश:

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