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1960 में भारत से बेहतर आर्थिक हालात वाला पाकिस्तान आज दिवालिया होने के कगार पर

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने एकबार कहा था कि दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पादोसी नहीं| यानी हम चाहें या न चाहें लेकिन पडोसी को अनदेखा नहीं किया जा सकता है फिर भले ही उससे रिश्ते कितने ही कटु क्यों न हों| भारत और पाकिस्तान का भी कुछ ऐसा ही रिश्ता है जिसको चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है| वहीँ प्रभावित हुए बिना भी नहीं रहा जा सकता है|

दोनों देशों के बीच रिश्ते की नींव आज से 75 साल पहले नफरत और साजिश की इंटों पर रखी गई थी| जो बदस्तूर जारी है| भारत का एक ऐसा विभाजन जिसने दोनों देशों की आत्मा पर लाखों शवों का बोझ डाल दिया| लेकिन बंटवारे के लिए उत्तरदायी भी कभी चैन की सांस नहीं ले पाए| आज भी दोनों देशों के वासिंदों के दिलों में बंटवारे की टीस है| अपने राजनेताओं के दिए दर्द के बावजूद भारत वक्त के साथ आगे बढ़कर विकास का हाथ थाम लिया लेकिन पाकिस्तान अपने आकाओं की स्वार्थ भी भट्टी में झुलसकर आज भी जलने को मजबूर हैं| नफ़रत की इमारत बनाकर पाकिस्तान आज खुद अपनी तबाही की कहानी लिख रहा है|

आज भारत दुनियां के टॉप 5 इकोनॉमी वाले देश की लिस्ट में शामिल हो गया है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कंगाली के दौर से गुज़र रही है|

इसी साल के अप्रैल महीने में इमरान ख़ान को सत्ता से हटाया गया था. उनके हटने के बाद देश में इतनी सियासी उठापटक हुई की यहां कि बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर आर्थिक संकट और भी ज्यादा बढ़ गया. अब यह देश अपनी डगमगाती अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की पूरी कोशिश कर रहा है. यही कारण है पाकिस्तान पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बेलआउट पैकेज की लगातार मांग कर रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आने वाले कुछ समय में पाकिस्तान सच में दिवालिया हो सकता है?

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की एक रिपोर्ट की मानें तो साल 2022 में इमरान ख़ान को सत्ता से हटाने तक इस देश की जीडीपी 6 फीसदी थी| जबकि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 0.6 फीसदी तक रहने का अनुमान है| 

हालाँकि एक वक्त ऐसा भी था जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत से भी अच्छी स्थिति में थी| पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय भारत से ज्यादा था और यह देश कृषि क्षेत्र में भी भारत से बेहतर था| साल 1960 में पाकिस्तान की पर कैपिटा जीडीपी 83.33 डॉलर थी जबकि उस वक्त भारत की पर कैपिटा जीडीपी 82.2 डॉलर थी. साल 1990 तक भी पाकिस्तान की जीडीपी लगभग भारत के बराबर रही. यानी दोनों देशों की जीडीपी 370 डॉलर पर पर्सन थी. इतना ही नहीं कई सोशियो-इकनॉमिक इंडीकेटर्स पर पाकिस्तान भारत से बेहतर स्थिति में था|  

लेकिन अपनी ही भारत विरोध की नीति को अपनाकर पाकिस्तान आज तबाही की कगार पर खड़ा हो गया है| कुछ समय पहले पाकिस्तान के ‘स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान’ ने जानकारी दी कि इस देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 4.19 अरब डॉलर रह गया है. किसी देश को चलाने के लिए ये राशि इतनी कम है कि इससे मुश्किल से एक महीने का आयात ही हो पाएगा| इस देश की खराब होती अर्थव्यवस्था ने न सिर्फ राजनीतिक दलों बल्कि आम जनता के बीच भी दहशत स्थिति पैदा कर दी है| पाकिस्तानी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार गिर रहा है| ऐसे में आने वाले समय में पाकिस्तान दिवालिया हो जाए तो आश्चर्य नहीं है|

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