
मनीष शुक्ल
अमेरिका पूरी तरह से “मोदी फाई” हो चुका है| अमेरिका के एक दो नहीं बल्कि 20 शहरों के भारतीय अमेरिकी भारत माता की जय और मोदी- मोदी के नारे लगा रहे हैं| पीएम के स्वागत के लिए जगह- जगह पर एकता मार्च निकाला गया है। ये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक अमेरिकी यात्रा है| जहाँ पर उनसे मिलने के लिए ऐसी दीवानगी है कि खुद राष्ट्रपति जो बाईड़ेन को कहना पड़ रहा है कि हर कोई पीएम मोदी से मिलने के लिए आना चाहता है जो संभव नहीं है| ये दीवानगी पहली बार नहीं है| कुछ ही समय पहले जापान में आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन में अमेरिकी पीएम जो बाइडेन ने पीएम मोदी से ऑटोग्राफ मांगे थे। ये न सिर्फ सुखद अहसास था बल्कि बदलते भारत की नई तस्वीर थी| अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली आधिकारिक यात्रा पर यूएस दौरे पर हैं| यही नया भारत है जिसकी दुनियां दीवानी है| भारत आज न सिर्फ सुपरपावर के साथ खड़ा है बल्कि अपने हितों के लिए मुखर भी है|
निश्चित रूप से यह सब कुछ अचानक नहीं हुआ है इसके लिए देश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नौ वर्षों की अथक यात्रा की है| साल 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते मजबूत होते चले गए| वो भी तब जब इस दौर में अमेरिका में अलग – अलग पार्टियों के तीन राष्ट्राध्यक्ष रहे। खास बात ये रही कि तीनों ही राष्ट्रपति पीएम मोदी के प्रशंसक रहे|
रिश्तों को मजबूत करने की पहल भी पीएम मोदी ने ही की थी जब वर्ष 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को बतौर मुख्य अतिथि गणतंत्र दिवस भारत बुलाया। तब उनकी पत्नी मिशेल ओबामा भी भारत आयीं थीं। इसके बाद ये सिलसिला बदस्तूर जारी है| बल्कि 2023 की मौजूदा अमेरिकी यात्रा के साथ रिश्तों को नया आयाम हासिल हो गया है| वो भी तब जब भारत के रिश्ते अमेरिका के धुर विरोधी रूस से भी पहले की तरह बने हुए हैं|
खुद पीएम मोदी ने अपनी अमेरिकी यात्रा से पहले साफ कर दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार और प्रतिबद्ध है। पीएम ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से इंटरव्यू में कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि हम तटस्थ हैं, लेकिन हम तटस्थ नहीं हैं। हम शांति के पक्ष में हैं। दुनिया को पूरा भरोसा है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता शांति है।
पीएम मोदी की यही आत्मविश्वास दुनियां में भारत के प्रति सम्मान पैदा करता है| हाल ही में ये नजारा क्वाड में दिखा भी था जब शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था, “अमेरिका में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बहुत ज़्यादा है। मैं आपका ऑटोग्राफ लेना चाहता हूं।“ अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयां महज बानगी भर है| पिछले नौ वर्षों में दोनों देशों के बीच सम्बन्ध बहत्त मजबूत हुए हैं| कारोबारी बाजार से लेकर रक्षा सम्बन्ध आज ज्यादा मजबूत हैं|
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी 21 से 23 जून अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। दौरे की शुरुआत 21 जून सुबह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में योगा दिवस समारोह से होगी। न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री कुछ बड़े नेताओं से मुलाकात भी करेंगे। 21 जून को वाशिंगटन डीसी में ‘स्केलिंग फॉर फ्यूचर’ पर आधारित एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति की ओर से पीएम मोदी को निजी रूप से भी भोज दिया जाएगा| ये दोनों देशों के रिश्तों को परिभाषित करता है|
अगर दोनों देशों के रिश्ते का आंकलन करें तो समझ में आएगा कि पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कुल सात बार मुलाकात की। ओबामा के बाद जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की सत्ता पर काबिज हुए तो ये दोस्ती और भी प्रगाढ़ हो गई| अमेरिका के ह्यूस्टन में हुआ ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम आज भी लोगों को याद है| अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा दोनों नेताओं के निजी रिश्तों को भी बयान करता है| वहीँ जो बाइड़ेन के कार्यकाल में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के आधिकारिक अतिथि हैं और दूसरी बार अमेरिकी संसद को संबोधित करने जा रहे हैं| निश्चित रूप से प्रधानमंत्री की ये यात्रा दुनियां भर के लिए उम्मीद के नए दरवाजे खोलेगा|