शहरों की आवोहवा को ठीक करेगा कैपेसिटीज़
Scaling Urban Climate Resilience: The CapaCITIES Legacy and Way Forward’ an event to celebrate the progress of CapaCITIES programme
- कैपेसिटीज़ की विरासत और आगे का रास्ता' कार्यक्रम आयोजित
- CapaCITIES ने शहरी जलवायु लचीलेपन के लिए एक खाका तैयार किया
नई दिल्ली : बेतरतीब शहरीकरण और प्रकृति के संससाधनों के अंधाधुंध दोहन से पैदा हुई जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने की कवायद तेज हो गई है| शहरी जलवायु परिवर्तन को नीतिगत इरादों से आगे बढ़कर संस्थागत कार्यान्वयन की ओर ले जाने के साझा प्रयास हो रहे हैं| जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों को शहरी नियोजन प्रणालियों में समाहित करने, स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने, सफल शहरी नेतृत्व वाले मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है| साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीले शहरी विकास को गति देने के लिए साझेदारी को गहरा करने की आवश्यकता महसूस हो रही है|
इसी कवायद को तेज करने के लिए ICLEI दक्षिण एशिया और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान द्वारा 'शहरी जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना : कैपेसिटीज की विरासत और आगे का रास्ता ' नमक कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया । कैपेसिटीज कार्यक्रम ने भारतीय शहरों को शहरी गवर्नेंस में कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-लचीले विकास को मुख्यधारा में लाने के लिए ज्ञान, उपकरण और संस्थागत क्षमताएं प्रदान की हैं।
CapaCITIES परियोजना के बारे में
भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड दूतावास द्वारा वित्त पोषित और वर्ष 2016 में शुरू की गई, भारत में कम कार्बन और जलवायु-लचीले शहरी विकास पर क्षमता निर्माण परियोजना (कैपेसिटीज) कार्यक्रम ने कम कार्बन और जलवायु-लचीले शहरी विकास को गति प्रदान की है। स्थानीय क्षमताओं को सीधे मजबूत करके, कार्यक्रम ने स्थानीय कार्रवाई को राष्ट्रीय मिशनों और राज्य-स्तरीय लक्ष्यों के साथ जोड़कर भारत के 2070 के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन किया है।
यह पहल ICLEI साउथ एशिया, साउथ पोल और ईकॉन्सेप्ट की सहयोगी साझेदारी के माध्यम से कार्यान्वित की गई, जिसमें राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान ज्ञान भागीदार था। तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, उदयपुर और सिलीगुड़ी शहरों के साथ-साथ गुजरात और तमिलनाडु की राज्य सरकारों को इस परियोजना से सहायता प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के बारे में
इस सम्मेलन में 30 से अधिक शहरों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, महापौर, आयुक्त और इंजीनियर, 6 राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थानों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ एकत्रित हुए, ताकि स्थानीय जलवायु क्षमताओं के निर्माण में एक दशक की समीक्षा की जा सके और शहरी सततता के भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा सके।
उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार श्री गोपाल प्रसाद , भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड दूतावास की राजदूत सुश्री माया तिस्साफी, वडोदरा नगर निगम की महापौर सुश्री गीताबेन मकवाना , राजकोट नगर निगम की उप महापौर सुश्री दक्षाबेन वसानी , राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान की निदेशक डॉ. देबोलीना कुंडू और ICLEI के उप महासचिव और ICLEI दक्षिण एशिया के कार्यकारी निदेशक श्री इमानी कुमार उपस्थित थे। सत्र में शहरी भारत में स्थानीय स्तर पर संचालित जलवायु कार्रवाई को व्यापक बनाने और संस्थागत रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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